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जीवन और हमारी अवधारणाएं

जीवन और हमारी अवधारणाएं

जीवन अर्थात् जन्म से मरण तक की संपूर्ण यात्रा ︳मानव के इस संसार रूपी भवसागर में आने से लेकर संसार त्यागने तक का सफर ︳किसी का सफर लंबा होता है तो किसी का छोटा ︳मानव की इस परिप्रेक्ष्य में सोच एवं अवधारणा यही है कि “प्रभु की इच्छा” और “भाग्य का लेखा” ︳ कुछ जन इसे किसी व्यक्ति विशेष के "कर्म  फल"  की भी संज्ञा देते हैं︳



जीवन को कई प्रकार से परिभाषित किया गया है - कुछ इसे अबूझ पहेली तो कुछ इसे अनजान राह बताते  हैं ︳ वास्तव में जीवन सुख और दुख का संगम है ︳ हमें हमेशा लगता है कि हमारे जीवन के तराजू पर दुख का पलड़ा भारी है ︳ यह  शायद हमारा भ्रम है ︳ हमारे पास इस तथ्य का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है︳ यदि हम भगवान के अस्तित्व पर विश्वास रखते हैं तो हमें  उनके न्याय पर भी विश्वास रखना चाहिए, ऐसा मस्तिष्क सोचता है पर हमारा अंतर्मन नहीं ︳

पीढ़ी अंतराल


आज  आए दिन युवा चरित्रों पर प्रश्नचिन्ह उठ रहे हैं ︳यह प्रश्न चिन्ह मात्र अपरिचित द्वारा ही नहीं स्वयं के माता पिता द्वारा भी उठाए जा रहे हैं︳ जन्मदाता, पालनकर्ता सोचते हैं विश्वविद्यालयों में जाकर, जीवन के किशोर वर्ग की सीमा आते- आते उनके पुत्र- पुत्रियां मार्ग भूल जाते हैं या यह कहे पदभ्रष्ट हो रहे हैं, उचित राह से भटक रहे है︳ 


युवा वर्ग सोचते हैं कि उनके माता-पिता मात्र अपनी रूढ़िवादी विचारधारा, आदर्श एवं संस्कारों के कारण अपने जीवन के मूल्यों में बाँध कर उनसे उनकी खुशियां छीनना चाह रहे हैं︳ दोनों ही अपनी दृष्टि में जीवन के उचित पक्ष को देख रहे हैं पर मैं पूछना चाहती हूं, क्या दोनों में से किसी ने भी सिक्के के विरोधी पहलुओं पर विचार किया है ? उत्तर सामान्यतया नहीं है︳ मां बाप बच्चों की संगति को, तो बच्चे उनकी सीमाओं और बंधनों को दोष दे रहे हैं︳

क्या है खुशी

// क्या है खुशी //


 आओ पल दो पल बात करले 
खुशियों का इजहार कर ले 
यह दुख जीवन भर संग रहेंगे 
ना इससे अब हम तंग रहेंगे 

हर दुख देता है खुशी को नई परिभाषा 
लाता है इस उपवन में फिर से नहीं आशा सोचता हूं 
मैं वह दुनिया कैसी होती
 जहां गम का निशान होता 
खुशियां ही खुशियां होती 
क्या खुशी-खुशी रह पाती ?

केंद्र प्रमुख का संदेश

केंद्र प्रमुख का द्वितीय संस्करण के प्रकाशन पर शुभकामना संदेश 


प्रिय मित्रो,


शब्द निवेश के द्वितीय  संस्करण के प्रकाशन पर सभी हिन्दी प्रेमियों का अभिवादन.

एक उत्कृष्ट इ - पत्रिका को साकार रूप देने के लिए  प्रभारी हिंदी अधिकारी श्री बाजपाईजी एवं उनकीं टीम को बधाई.  हिंदी के  प्रसार प्रचार में डिजिटल प्लेटफार्म बहुत  सकारत्मक रोल  निभा सकते हैं और इसका ज्वलंत उदहारण हमारी शब्द निवेश पत्रिका.


250 कर्मचारियों वाले ऑफिस में प्रकाशित हुई इस पत्रिका को 5000 से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं जो इस बात को साबित करता हैं की इस पत्रिका को पढनेवाले मात्र भोपाल और चंद ऑफिस के कर्मचारी ही नहीं बल्कि पाठको का दायरा उससे भी कही अधिक बढ़के हैं और ये संभव हो पाया हैं पत्रिका को डिजिटल प्लेटफार्म पर प्रकाशित करने से.


में आशा करता हूँ की ये सिलसिला आगे भी इस तरह जारी रहेगा और हम सब मिलकर माँ सरस्वती के चरणों में अपनी रचना रुपी पुष्पों की भेट इसी तरह चढ़ाते  रहेंगे.



शुभकामनाओ के साथ

भोपाल

08-01-2018

आशीष पोतनीस
उप महानिदेशक( अभियांत्रिकी)
दूरदर्शन केंद्र भोपाल

दूरदर्शन की यात्रा

दूरदर्शन की यात्रा  


भारत में  'दूरदर्शन' की स्‍थापना एक परीक्षण के तौर पर दिल्ली में 15 सितंबर 1959 को हुई थी. भारत में टेलीविजन के इतिहास की कहानी दूरदर्शन के इतिहास से ही शुरू होती है. आज भी दूरदर्शन का नाम सुनते ही अतीत की कई गुदगुदाती बातें याद आ जाती हैं. भले ही आज टीवी चैनल्स पर कार्यक्रमों की बाढ़ आ गई हो लेकिन दूरदर्शन की पहुंच को टक्कर दे पाना अभी भी किसी के बस की बात नहीं है . 

उप निदेशक डीडीके भोपाल का शुभ कामना सन्देश

दूरदर्शन भोपाल कि राजभाषा ई पत्रिका “शब्द निवेश” के द्वितीय अंक के लिए शब्द निवेश सम्पादन मंडल , रचनाकारों और हिंदी एकांश को शुभकामनायें .

           मुझे आशा ही नहीं अपितु विश्वास है कि यह अंक देश भर के आकाशवाणी और दूरदर्शन के सदस्यों द्वारा सराहा जावेगा . आप सभी को नव वर्ष अंक और नव वर्ष २०१८ के लिए हार्दिक शुभकामनायें .

( परशुराम आर्य )
उप निदेशक (.अभि)

राजभाषा सम्मान


राजभाषा सम्मान

दूरदर्शन केंद्र भोपाल को नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति भोपाल द्वारा आहुत छह मासिक शामिक्षा बैठक में राजभाषा में किये जा रहे सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित क्या गया |


राजभाषा सम्मान
  
राजभाषा कार्यान्वयन समिति भोपाल के अध्यक्ष महोदय द्वारा यह सम्मान केन्द्राध्यक्ष श्री आशीष पोतनीस उप महानिदेशक ( अभि. ) दूरदर्शन को दिया गया |

हिंदी कार्यशाला


दूरदर्शन केंद्र के समस्त अधिकारीयों और कर्मचारियों के कार्यों का यह सम्मान है , जो हमे भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा |



पाथेय


 पाथेय

यूं तो खाली हाथ हूं 
पर साथ है 

धधकती धूप की ओट में 
अधखिली चांदनी 
गुनगुनाती धूप 
 और पहली बारिश की 

लछमा


लछमा, हाँ यही नाम है इस छोटी सी बेटी का l शहर के कोलाहल से दूर बिहार का एक छोटा सा गाँव, और इसी गाँव के रहने वाले एक गरीब परिवार की बेटी, पिता और माँ दोनों सुबह से ही खेत पर मजदूरी करने चले जाते और घर पर रह गए छोटे-छोटे दो भाईयों का ध्यान रखने की जिम्मेदारी उठाती लछमा l



      सुबह होती, माँ की आवाज आती चल उठ बिट्टो, सूरज निकल आया, उस पर अलसाई, उनींदी सी लछमा का जबाब माँ थोड़ी देर रुक जा ना, नीद आ रही है, माँ कहती बेटी तू सोती रहेगी तो हमें भी काम पर जाने को देर हो जाएगी और तब नन्ही से लछमा मान मारकर उठ जाती, देखती बगल में सो रहे दोनों छोटे भाईयों को और मन ही मन सोचती कितना अच्छा होता यदि मैं भी.... l 

बेटी को मत समझो भार जीवन का है ये आधार



दरवाजे पर घंटी घनघना रही थी l सोधे से उठकर मिसेन शर्मा ने दरवाजा खोला तो क्या मुहल्ले के सारी औरतें खड़ी हुई थी l

      बधाई हो बधाई हो मिसेज शर्मा – सारी औरते एक स्वर में बोली l
      मिसेज शर्मा – अरे काहे की बधाई l

      अच्छा, घर में लक्ष्मी आई हैं l आपको तो नगर ढ़िढ़ोरा दिरवाना था l

खुशियां


कितनी हसीन दौलत वक्शी है रब ने मुझे
जितनी भी बाटता हूँ खुशियां, कम नहीं होती

कुछ तो होता है असर दिल पर हादसों का
वर्ना आँखे यू वे वजह ही कभी नम नहीं होती


घर में रहता हूँ या सफर में रहू यारो सच है
दुआयें बुजुर्गों की कभी बे-असर नहीं होती
देता रहता है जो सदा परिन्दों को दाना-पानी

वर्तमान परिद्श्य में लोक प्रसारण में हिन्दी की भूमिका


वर्तमान परिद्श्य में लोक प्रसारण में हिन्दी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है l हमारा राष्ट्र हिन्दी राष्ट्र है तथा अधिकतर लोग हिन्दी में ही अपने दैनिक कार्य करते है एवं अपने आपको, अपने विचारों को बेहतर तरीके से अभिव्यक्त कर सकते है आज हमने विश्व में देखा है कि अपनी मातृ भाषा में काम करके भी विभिन्न देशों ने सफलता का परचम लहराया है, इसमें प्रमुख देश है चीन, फ्रांस, जापान आज चीन दुनिया में विकसित देशों की गिनती में है फ्रांस जापान भी विकसित देशों में आते है l वो सभी अपनी मातृभाषा में काम करते है एवं उनके लोक प्रसारक अपनी मातृभाषा में ही प्रसारण करते है l

डर - एक कविता

डर है एक माँ को अपने बच्चे को भेजते हुए पाठशाला
कहीं किसी ने न रख दिया हो बम पाठशाला में
शिक्षक भी हैं डूबे किसी सोच में
कि कितने स्वप्न हैं बच्चों की आँखों में
बनने के इंजिनियर, डॉक्टर और वैज्ञानिक,


प्रशासनिक अधिकारी भोपाल का शुभ कामना सन्देश

दूरदर्शन परिवार को नव वर्ष कि हार्दिक शुभकामनायें , हम सब इस वर्ष को केंद्र को देश के बेहतरीन कार्यकुशल केंद्र के रूप में प्रतिस्थापित करने के लिए संकल्पित होकर कार्य करें यह कामना करता हूँ. हिंदी एकांश श्री बाजपेयी के अतिरिक्त प्रभार में बेहतर परिणाम ला रहा है , नाराकाशा भोपाल द्वारा मिला सम्मान इसका प्रमाण है. केंद्र प्रमुख श्री आशीष पोतनीस जी के सक्रीय नेतृत्व  में प्रारम्भ शब्द निवेश का प्रकाशन भी देश में ई पत्रिका के तौर प्रथम प्रयाश है जो आज सफल हो कर अपने नए अंक को लोकार्पित करने जा रहा है, शब्द निवेश परिवार को हार्दिक शुभकामनायें.  


(अरविन्द गुप्ता)
प्रशासनिक अधिकारी 

कार्यक्रम प्रमुख डीडीके भोपाल का शुभ कामना सन्देश

में दूरदर्शन भोपाल कि राजभाषा ई पत्रिका शब्द निवेश के प्रथम संस्करण को मिले ६००० से अधिक पाठक संख्या को जान हतप्रत हूँ. यह निश्चित ही श्रेष्ठ पाठ्य सामग्री कि वजह से हुआ है. में कार्यक्रम अनुभाग दूरदर्शन केंद्र कि ओर से शब्द निवेश नव वर्ष अंक के लिए हिंदी अनुभाग को बहुत बहुत शुभकामनायें  देता हूँ और आशा करता हूँ कि यह अंक और अधिक सराहा जावे. भविष्य में देश भर के आकाशवाणी और दूरदर्शन के रचनाकारों  के लिए अभिव्यक्ति का मुख्य श्रोत बने कामना करता हूँ.


(विवेक पाराशर )
  कार्यक्रम प्रमुख   

मैंने साये से बोला


मैंने साये से बोला तू काला बहुत है,
साया बोला सच बोलूं तू जीवन से जला बहुत है
मैंने कहा तेरी तासीर ही काली है


तू पीछा क्यों नहीं छोड़ता मेरा
वो बोला तू मुझो चाहता है पीछा छुड़ाना
तो अपने को अंधेरे कमरे में बंद कर ले
मैं स्वयं चला जाऊंगा या फिर
कर ले अपने चारों तरफ रौशनी

बेटी बचाओ... बेटी पढ़ाओ

      
कहानी का परिवेश है, मंदसौर और नीमच के बीच मुख्य-सड़क से जुड़े गाँव की जहाँ वांछड़ा जाति के लोग वेश्यावृति का घंघा करते हैl

      मैं और मेरी टीम वांछड़ा जाति पर जानकारी लेने यहाँ पहुंचे थे l चूँकि ऐसी जगहों पर जाना जोखिम से भरा होता है, अत: हम लोगों ने एक समाज सेविका (जिनको वो लोग बहुत आदर करते थे) को साथ ले लिया जैसे ही उन्हें पता चला की यह एक मिडिया के लोग है, उन्होंने बात करने से मना कर दिया...

      फिर भी कुछ लोग एक सामान्य सी बात करके चले गये...
      समाज – सेविका ने हमें बताया की यही एक मात्र लोग हैं, जो “बेटी पैदा होने पर खुशियाँ मनाते हैं l”

      वो इसलिए की अगर बेटी पैदा होगी तो वेश्यावृति से घर का काम चलता रहेगा,
      शाम को हम लोग अपने गेस्ट-हाउस में आ गये... रात होते ही अचानक मन में ख्याल आया की क्यों न उस मुख्य सड़क का भ्रमण किया जाये जहाँ पूरी रात राह चलते वेश्यावृति का काम चलता है l

बेटियां


रिश्तो को माला में पिरोती है बेटियां
घर की नीव, दीवार, छत होती l बेटियां

महकता है जिनके होने से आगंन
वह खुशबू होती है बेटिया
आज माँ, बाप न भटकते दर-दर

अगर कोख में ना मारते बेटियां
क्यो मारते हो हमें जन्म लेने से पहले
रोते-रोते कहती है बेटियां