प्रतियोगिता – पोस्टर आधारित लेखन
नियमित कर्मियों के लिए
हिन्दी पखवाड़ा – 2025 (प्रथम पुरस्कार)
नाम – तनवीर अहमद खान, पद – तकनिशियन
(ईश्वर, सृष्टि एवं विज्ञान)
एक बार की बात है एक प्रयोगशाला में दो
वैज्ञानिक कार्य करते थे उनमें से एक वैज्ञानिक आस्तिक एवं दूसरा वैज्ञानिक
नास्तिक था, आस्तिक कहता कि ईश्वर है एवं नास्तिक कहता कि कोई ईश्वर नाम की वस्तु
नहीं है। दोनों में कई बार कई कारणों से वाद-विवाद हो जाता था। एक
एक दिन आस्तिक
वैज्ञानिक का अवकाश था नास्तिक वैज्ञानिक जब प्रयोगशाला में पहुंचा तो उसने देखा
कि पूरी गैलेक्सी एवं ब्रहमांड की प्रतिकृति बनी हुई है। जिसमें नौ ग्रह बने हुए हैं। खगोलिय घटना से किस प्रकार
एक गैलेक्सी का निर्माण हुआ एवं किस प्रकार उसमें ग्रहों का एवं तारा मंडल का
निर्माण हुआ उनमें से पृथ्वी पर किस प्रकार जीवन आया क्यूंकि जीवन के लिए आवश्यक
प्रकाश, वायू
एवं जल केवल पृथ्वी पर मौजूद था। ये सभी ग्रह जब बनाए गए जब इनका आकार अलग-अलग था
हो सकता है, ये सभी
पहले गोल भी न रहे हों परिक्रमा लगाते लगाते गोल हो गए हों। जिस प्रकार एक लोहे के
टुकड़े को अत्यधिक गर्म करके बहुत तेज गति से घुमाया जाता है तो गोलाकार हो जाता
है। इन सभी ग्रहों का तापमान अलग-अलग है। इन पर वायु का दबाव भी अलग-अलग है। जीवन
की उत्पत्ति पृथ्वी पर हजारों लाखों साल पहले मानी जाती है। अब पहले मनुष्य की
उत्पत्ति हुई या अन्य जीव जन्तुओं की ये भी ईश्वर से अधिक कोई नहीं जानता है। जीवन
को आगे बढ़ाने के लिए उनको जीवित रखने के लिए भाँति-भाँति के फल सब्जियां उगाई गईं, ईश्वर मनुष्य को एक छोटे से कण से पैदा कर देता है
जिसको हम साधारण आँखों से भी नहीं देख पाते हैं। मनुष्य को ईश्वर ने बनाया एवं
ईश्वर ने मनुष्य को जो बुद्धि दी उसकी मदद से मनुष्य ने पृथ्वी पर ही स्वर्ग बना
दिया पहले मनुष्य जंगलों में रहता था अपने शरीर को पेड़ पत्तों से ढाकता था।
धीरे-धीरे मनुष्य ने अपने लिए वस्त्र बनाए रहने के लिए पहले झोपड़ी फिर मकान फिर
उसके बाद आलीशान महल बनाए। पहले मनुष्य कच्ची सब्जियाँ ही चबा लेता था फिर उसके
बाद उसने अग्नि को जलाना सीखा और खाना उसमें पका कर खाने लगा। पहले मनोंरंजन के
लिए नृत्य, गायन
से ही काम चलता था अब रेडियो, टीवी, कम्प्यूटर, मोबाईल, सिनेमा से मनोरंजन करने लगा, पहले हर मौसम में रहता था अब गर्मी में AC, कूलर, पंखे की आवश्यकता पड़ने लगी। विश्व में करोड़ो की
संख्या में स्त्री पुरूष निवास करते है। अलग-अलग धर्म को मानते है। अलग-अलग बोली
बोलते हैं परन्तु इनमें जो आस्तिक है उन सबका मानना है कि एक ईश्वर रूपी व्यक्ति
है जिसने सृष्टि की रचना की है और वही इसको चला रहा है। विश्व में समय-समय पर
ईश्वर के दूत भेजे गये या ईश्वर ने उनके नाम से पृथ्वी पर जन्म लिया उन सब ने भी
यही बताया कि संसार में हमको ईश्वर ने किसी उद्देश्य से भेजा है और हम में से कई
लोग उद्देश्य से भटक जाते है।
अब मैंने अपनी बात जहाँ से आरंभ की
थी वहीं पहुंचना चाहूंगा। आस्तिक वैज्ञानिक ने अगले दिन नास्तिक वैज्ञानिक से पूछा
कि ये सब क्या है। कहां से आ गया ये अन्तरिक्ष का मॉडल किसने बनाया है। नासित्क
वैज्ञानिक का जवाब था जब मैं आया तो पहले से बना हुआ था। आस्तिक वैज्ञानिक बोला ये
अपने आप बन गया होगा, नास्तिक वैज्ञानिक बोला ये अपने आप से कैसे बन सकता है।
बिना किसी के बनाए, तो आस्तिक वैज्ञानिक बोला जब एक छोटा सा मॉडल अपने आप नहीं वन सकता है। तो इतनी बड़ी सृष्टि, इतना बड़ा ब्रह्मांड अपने आप से कैसे बन सकता है। उसको
भी किसी ने बनाया है और वही ईश्वर है जिसको पूरी सृष्टि अलग-अलग नाम से पुकारती
है। नास्तिक वैज्ञानिक सोच में पड़ गया और उसके बाद वा आस्तिक हो गया और ईश्वर को
मानने लगा। आज मनुष्य सृष्टि से ही खिलवाड़ कर रहा है जो सरासर गलत है। इसमें सबसे
नई खोज AI है। आर्टिफिशियल
इंटेलीजेंस जिससे बहुत फायदें भी देखने को मिल रहें है लेकिन इसके दूरगामी नुकसान
भी संभव है जो आने वाले समय में देखने को मिलेंगे।