विकसित भारत @2047 के लिए महत्वपूर्ण है श्रम सुधार

 

विकसित भारत @2047 के लिए महत्वपूर्ण है श्रम सुधार

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कई साहसिक निर्णय लेने, परिवर्तनकारी नीतियों और एक नई वैश्विक छवि के लिए जानी जा रही है। सबका साथ सबका विकास की अवधारणा पर कार्य करते प्रधानमंत्री श्री मोदी की सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णय लेकर हर वर्ग की उन्नति के लिए कार्य किए हैं। बीते 12 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजनाएं पहुंचाने का जो सुशासन स्थापित किया है वह अद्वितीय रहा है। बीते दिनों श्री मोदी के नेतृत्व में सरकार ने एक और ऐतिहासिक निर्णय के तहत चार श्रम संहिताओं वेतन संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्‍यवसायिक सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कार्य शर्त संहिता, 2020 को लागू किया गया है। इससे केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, स्वायत्त निकायों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में कार्यरत आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य समय पर वेतन का भुगतान, अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा अंशदान, ठेकेदारों और प्रमुख नियोक्ताओं की अधिक जवाबदेही तथा श्रम कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ मजबूत प्रवर्तन व्‍यवस्‍था सुनिश्चित होगी। इन उपायों से संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी और वैधानिक देय राशियों के भुगतान में चूक कम हो सकेगी। निर्देशों में इस बात पर बल दिया गया है कि व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति संहिता, 2020 की धारा 55-3 के अंतर्गत, मुख्य नियोक्ता के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि ठेकेदार समय पर वेतन का भुगतान करें। निर्देशों में वेतन भुगतान के लिए समयसीमा निर्धारित करने वाली वेतन संहिता, 2019 की धारा 17-1 का भी उल्लेख किया गया है।

                केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया यह कानून न केवल कारगारों और नियोक्ताओं के हित में है बल्कि दोनों के बीच संबंध में पारदर्शिता लाने के लिए भी महत्वपूर्ण है। श्रम कानून विकसित भारत की कल्पना को साकार करने के लिए भी बेहद जरूरी था। श्रमिकों को लेकर मौजूदा सरकार की दूरगामी सोच अक्टूबर 2014 में ही स्पष्ट हो गई थी। सत्ता की कमान संभालने के साथ ही प्रधानमंत्री श्री मोदी ने श्रमेव जयते योजना की शुरुआत कर दी थी। श्रमिकों को प्राथमिकता देते हुए प्रधानमंत्री ने 16 अक्टूबर 2014 को जब 'श्रमेव जयते' की शुरुआत की, तब श्रमिकों को 'राष्ट्र निर्माता' की संज्ञा देते हुए कहा था कि जितनी ताकत 'सत्यमेव जयते' की है उतनी ही ताकत राष्ट्र के विकास के लिए 'श्रमेव जयते' की भी है। जिसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा श्रम कानूनों में सुधार से पहले व्यापक विचार-विमर्श किया गया। सबसे पहले मंत्रालय ने चारों प्रारूप संहिताओं को सरकार की पूर्व-विधायी नीति के तहत वेबसाइट्स पर अपलोड किया ताकि सभी हितधारक व आम जनता अपने विचार दे सकें। मंत्रालय ने वर्ष 2015 से 2019 की अवधि में 9 त्रिपक्षीय बैठकें आयोजित कीं जिनमें सभी केंद्रीय श्रमिक संगठनों, नियोक्ताओं के संगठनों व राज्य सरकारों के प्रतिनिधि-यों को श्रम सुधारों पर अपने सुझाव व विचारों के लिए आमंत्रित किया। चारों विधेयकों की संसदीय स्थायी समिति ने भी जांच की व अपनी सिफारिशें सरकार को दीं। तब जा कर इसे 29 मौजूदा श्रम कानूनों के स्‍थान पर लागू किया गया है। 

           गौरतलब हो कि, देश के कई श्रम कानून आजादी से पहले और आजादी के बाद के शुरुआती दौर में बनाए गए थे, लेकिन उस समय तक परिस्थितियां बहुत अलग थी। जहां बड़ी अर्थव्यवस्था वाले अधिकतर देशों ने अपने श्रम नियमों को मजबूत किया है, वहीं हम 29 केंद्रीय श्रम कानूनों में फैले बिखरे हुए, मुश्किल और कई हिस्सों में पुराने नियमों के तहत काम कर रहे हैं। जिससे बदलती परिस्थितियों के साथ अनिश्चितता पैदा हुई और मजदूरों और इंडस्ट्री दोनों के लिए नियमों का पालन करने का बोझ बढ़ा है। चार श्रम कानून को लागू करने से औपनिवेशिक जमाने की संरचना से आगे बढ़ने और आधुनिक वैश्विक ट्रेंड के साथ तालमेल बिठाने की इस लंबे समय से चली आ रही जरूरत को पूरा किया गया है। ये चार श्रम संहिता देश के श्रमबल के लिए बेहतर वेतन, रक्षा, सामाजिक सुरक्षा और बेहतर कल्याण जैसे बड़े बदलाव की शुरूआत मानी जा रही हैं। ये संहिता मिलकर मजदूरों और कंपनियों दोनों को मजबूत बनाते हैं, एक ऐसा श्रमबल तैयार करते हैं जो सुरक्षित, उत्पादक और काम की बदलती दुनिया के साथ तालमेल बिठाता है, इससे ज़्यादा मजबूत, प्रतिस्पर्धात्मक और आत्मनिर्भर देश बनने का रास्ता बनता है।

             इस श्रम सुधार से अब कई बदलाव सामने आयेंगे। जैसे रोजगार के लिए पहले कोई अनिवार्य नियुक्ति पत्र नहीं होता था, लेकिन अब सभी कामगारों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। यह एक लिखित सबूत होगा और इससे पारदर्शिता, रोजगार गारंटी और पक्का रोजगार होने की संभावना बनी रहेगी। श्रम सुधार सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों सहित सभी कामगारों को सामाजिक सुरक्षा देगा। जिसके तहत सभी कामगारों को पीएफ, ईएसआईसी, बीमा और दूसरे सामाजिक सुरक्षा लाभ मिल सकेंगे। सबसे बड़ा सुधार वेतन को लेकर आयेगा। आज वेतन प्रायः हर व्यक्ति का सामाजिक और आर्थिक नाता बाना बनने का जरिया हो गया है। वेतन न केवल आर्थिक सुरक्षा बल्कि समाज में व्यक्ति के सम्मान के रूप में भी देखा जाता है। इस श्रम सुधार से वेतन संहिता, 2019 के तहत, सभी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन भुगतान पाने का कानूनी अधिकार होगा। स्वाभाविक है कि न्यूनतम मजदूरी और समय वेतन से व्यक्ति की वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा बेहतर होगी। नियोक्ताओं के लिए समय पर वेतन देना अनिवार्य होगा। साथ ही वित्तीय स्थायित्व मजबूत करना, काम का तनाव कम करना और कामगारों का पूरा हौसला बढ़ाना भी जिम्मेदारी होगी। नियोक्ताओं को 40 साल से ज़्यादा उम्र के सभी कर्मचारियों की सालाना मुफ्त स्वास्थ्य जांच करानी होगी। महिलाओं को सभी जगहों पर सभी तरह के काम करने की इजाजत होगी, इसके लिए महिलाओं की सहमति लेनी होगी और जरूरी सुरक्षा उपाय करने होंगे। 

              इस श्रम सुधार से न केवल कारगारों को अपितु नियोक्ताओं को भी लाभ होगा। इसके तहत फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के बराबर सभी फायदे मिलेंगे, जिसमें छुट्टी, चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा शामिल होगी। पांच साल के बजाय सिर्फ एक साल बाद ग्रेच्युटी की योग्यता हासिल होगी। स्थायी कर्मचारी के बराबर वेतन, इनकम और सुरक्षा मिल सकेगी। श्रम सुधार में गिग वर्क, प्लेटफ़ॉर्म वर्क और एग्रीगेटर्स को पहली बार परिभाषित किया गया है। एग्रीगेटर्स को वार्षिक टर्नओवर का 1-2 प्रतिशत योगदान करना होगा, जो गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भुगतान की गई देय राशि के 5 प्रतिशत तक सीमित होगा। फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉई से रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी और सामाजिक सुरक्षा, स्थायी कर्मचारी के बराबर फायदे जैसे कानूनी सुरक्षा पक्की होगी। फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी एक साल की लगातार सेवा के बाद ग्रेच्युटी के हकदार हो जाएंगे। मुख्य नियोक्ता अनुबंध कामगारों को स्वास्थ्य लाभ और सामाजिक सुरक्षा लाभ देगा। महिला-पुरूष के समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित किया जाएगा। महिलाओं को रात्रि पाली और सभी तरह के काम कर सकेंगी। इसके लिए उनकी सहमति हो और सुरक्षा के जरूरी उपाय किए गए हों। शिकायत निवारण समितियों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा। इसी के साथ महिला कर्मचारियों के परिवार परिभाषा में सास-ससुर को जोड़ने का प्रावधान, डिपेंडेंट कवरेज को बढ़ाना और इनक्लूसिविटी पक्का करना है। 

                प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के श्रम सुधार जैसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय से न केवल आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा बल्कि विश्व में हम सबसे बड़ी श्रम शक्ति के तौर पर भी उभर कर सामने आयेंगे। जाहिर है यह ऐतिहासिक निर्णय विकसित भारत @2047 की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगे। 

 

अक्षय नेमा, कॉपी एडिटर शब्द

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