हिन्दी भारत की राजभाषा है और विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। हिन्दी भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
हिन्दी अब विश्व की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, जो भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, मॉरीशस, फिजी आदि देशों में बोली जाती है। हर साल 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और उसके वैश्विक महत्व को बढ़ावा देना है। आजकल हिन्दी भाषा का प्रयोग तकनीकी क्षेत्र में भी बढ़ रहा है, जैसे कि गूगल जैसे सर्च इंजन में हिन्दी का महत्व बढ़ रहा है। भाषा एक देश की संस्कृति, इतिहास और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है
भारत जैसे बहुभाषी देश में आम जनता के लिए
संपर्क की भाषा हिन्दी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, हिन्दी की लोकप्रियता में
वृद्धि हो रही है और यह एक वैश्विक भाषा के रूप में विकसित हो रही है।
विदेशी सरकारें भी भारत में जनसंवाद स्थापित करने के दृष्टिकोण से आज कल
बहुत कुछ कर रही हैं। विभिन्न विदेशी संचार माध्यम विशुद्ध हिन्दी में प्रसारण
करते हैं। रेडियो तेहरान, जापान रेडियो, चायना रेडियो इंटरनेशनल, कुवैत रेडियो
आदि अनेक विदेशी रेडियो स्टेशनों से नियमित हिन्दी के कार्यक्रम प्रसारित किए जाते
हैं।
वर्तमान समय में भारत के बाहर विश्व के लगभग एक
सौ पचास विश्वविद्यालयों में हिन्दी की विधिवत शिक्षा दी जा रही है। जिस देश की
अपनी एक भाषा नहीं होती, वह देश अपनी
सांस्कृतिक पहचान और एकता को बनाए रखने में चुनौतियों का सामना कर सकता है।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में हिंदी के शब्दों को
शामिल करना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो हिंदी भाषा
की व्यापक पहुंच और महत्व को दर्शाता है। हाल ही में, ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में 'स्वदेशी', 'आधार' और 'अच्छा' जैसे शब्द जोड़े गए हैं।
इसके अलावा, 'देश', 'बिंदास', 'दीया', 'बच्चा' और 'अलमारी' जैसे 800 से अधिक हिंदी शब्दों के उच्चारण दिशानिर्देश और ऑडियो भी शामिल किए गए हैं।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में हिंदी शब्दों को शामिल करना भाषाई विविधता का सम्मान करने और भारतीय भाषा की महत्ता को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। डिक्शनरी में हिंदी शब्दों के शामिल होने से शोधकर्ताओं और विद्वानों को भारतीय भाषा और संस्कृति के अध्ययन में मदद मिलेगी।
ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में हिंदी शब्दों के शामिल
होने से हिंदी भाषा की वैश्विक पहुंच बढ़ेगी और यह दुनिया भर में हिंदी भाषा के
प्रचार-प्रसार में मदद करेगा। मैं
अनुराधा सिंह का हिन्दी दिवस पर एक लेख पढ़ रहा था उन्होंने लिखा है ,
"देश निर्वासित नहीं होते, अपने भूगोल में खड़े रहते हैं, उसी जगह, मौन, निरुपाय, रक्तरंजित। संस्कृतियाँ निर्वासित होती हैं, भाषा और इतिहास निर्वासित होते हैं। प्रयास तो बहुत हुए कि हिन्दी का स्थान एक
विदेशी भाषा ले ले और हम अपने ही देश में पंगु, श्रीहीन और निर्वासित हो जायें किन्तु हिन्दी, हमारी प्यारी हिन्दी बनी ही रही। भले ही खड़ी बोली हिन्दी का इतिहास बहुत
प्राचीन नहीं किन्तु जन्मी तो हमारी आदि भाषाओं और मिट्टी से ही है।
कोई स्रोत कहता है कि हिन्दी में कुल डेढ़ लाख
शब्द हैं तो कोई कहता है ढाई लाख लेकिन हम 1 या 2 हज़ार शब्दों से अधिक का प्रयोग नहीं करते हैं।
जिनका प्रयोग करते हैं उनमें भी वर्तनी की अशुद्धियाँ छोड़कर अपने सहज और बेपरवाह
होने का प्रमाण देते फिरते हैं। सुंदर, समृद्ध भाषा को क्लिष्ट और दुष्कर कहकर अपनी असमर्थता पर पर्दा डालते हैं। नई
हिन्दी क्या है? फिर तो हमें मुंबईया में
भी साहित्य लिखना चाहिए।
केन्द्रीय हिन्दी समिति ने हिंदी वर्णमाला में संशोधन करते हुए "ळ" को विशिष्ट व्यंजन के रूप में शामिल किया है। अपनी हिन्दी में अब कुल वर्णों की संख्या 52 से बढ़कर 53 हो गई है।
'ळ' वर्ण पहले से ही मराठी जैसी भाषाओं में प्रयोग होता है, और इसे हिंदी में शामिल करने से हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं के बीच सामंजस्य
बढ़ता है
अब 'कुळकर्णी' लिखते समय आपको 'कुलकर्णी' नहीं लिखना पड़ेगा।
हिंदी के 52 वर्णों (स्वर और व्यंजन) की वर्णमाला
का ज्ञान दूसरी भाषाओं को सीखने में एक आधारभूत सहायता प्रदान करता है, खासकर ध्वनि और शब्दावली के स्तर पर।
किसी
भी स्वतंत्र देश के लिए, जो महत्व उसके
राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का है, वही उसकी राजभाषा का है।
हिन्दी
दोयम दर्जे की भाषा नहीं है, बल्कि यह एक
समृद्ध और महत्वपूर्ण भाषा है जो भारतीय समाज को एकजुट करती है।
देवेश कुमार पाण्डेय
